म्यूचुअल फंड निवेश क्या होता है? पूरी जानकारी हिन्दी में 2026

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परिचय

क्या आपने कभी सोचा है कि अपनी मेहनत की कमाई को कहाँ निवेश करें जहाँ वह सुरक्षित भी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिले? बैंक में पैसा रखने पर ब्याज कम मिलता है और शेयर बाजार में सीधे निवेश करना जोखिम भरा लग सकता है। ऐसे में Mutual Fund निवेश एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आता है।

म्यूचुअल फंड आज के समय में भारत में सबसे लोकप्रिय निवेश के साधनों में से एक है। यह छोटे और बड़े दोनों निवेशकों के लिए उपयुक्त है। चाहे आप एक विद्यार्थी हों, नौकरीपेशा हों, व्यवसायी हों या गृहिणी, Mutual Fund में निवेश आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि निवेश फंड क्या है, यह कैसे काम करता है, इसके प्रकार, फायदे, नुकसान और निवेश करने का सही तरीका क्या है।

म्यूचुअल फंड क्या है?

निवेश फंड एक ऐसी निवेश योजना है जिसमें कई निवेशकों का पैसा एक साथ इकट्ठा किया जाता है। इस इकट्ठे किए गए पैसे को पेशेवर फंड मैनेजर विभिन्न जगहों पर निवेश करते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो म्यूचुअल फंड एक प्रकार का सामूहिक निवेश है। जैसे कई लोग मिलकर एक बड़ा काम करते हैं, वैसे ही कई निवेशक अपना पैसा एक जगह जमा करते हैं और उसे विशेषज्ञों द्वारा प्रबंधित करवाते हैं।

म्यूचुअल फंड की परिभाषा

Mutual Fund एक ऐसा ट्रस्ट है जो विभिन्न निवेशकों से पैसा इकट्ठा करके उसे शेयर बाजार, बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करता है। इससे मिलने वाला लाभ या हानि सभी निवेशकों में उनके निवेश के अनुपात में बांटी जाती है।

म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है?

Mutual Fund की कार्यप्रणाली को समझना बहुत आसान है। आइए इसे कदम दर कदम समझते हैं।

पहला चरण – पैसा इकट्ठा करना

सबसे पहले एक फंड हाउस या परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी एक योजना शुरू करती है। इस योजना में विभिन्न निवेशक अपना पैसा लगाते हैं। कोई व्यक्ति पांच सौ रुपये लगा सकता है तो कोई लाखों रुपये।

दूसरा चरण – निवेश करना

इकट्ठा किए गए पैसे को अनुभवी फंड मैनेजर संभालते हैं। ये विशेषज्ञ बाजार का गहन अध्ययन करके तय करते हैं कि पैसा कहाँ लगाना है। वे विभिन्न कंपनियों के शेयर, सरकारी बॉन्ड या अन्य प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं।

तीसरा चरण – लाभ या हानि

निवेश से जो भी लाभ या हानि होती है, वह सभी निवेशकों में उनकी निवेश राशि के अनुपात में बंटती है। अगर फंड ने अच्छा प्रदर्शन किया तो सभी को लाभ मिलता है।

चौथा चरण – यूनिट की अवधारणा

जब आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं तो आपको यूनिट मिलती हैं। हर यूनिट की एक कीमत होती है जिसे नेट एसेट वैल्यू या एनएवी कहते हैं। यह कीमत बाजार की स्थिति के अनुसार रोज बदलती रहती है।

म्यूचुअल फंड के प्रकार

म्यूचुअल फंड कई प्रकार के होते हैं। हर निवेशक की जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता अलग होती है, इसलिए विभिन्न प्रकार के फंड उपलब्ध हैं।

इक्विटी म्यूचुअल फंड

यह फंड मुख्य रूप से शेयर बाजार में निवेश करते हैं। इनमें जोखिम अधिक होता है लेकिन लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना भी ज्यादा रहती है।

विशेषताएं:

  • उच्च रिटर्न की संभावना
  • लंबी अवधि के लिए उपयुक्त
  • बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित

डेट म्यूचुअल फंड

ये फंड सरकारी प्रतिभूतियों, कॉर्पोरेट बॉन्ड और अन्य ऋण साधनों में निवेश करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है और स्थिर रिटर्न मिलता है।

विशेषताएं:

  • कम जोखिम
  • नियमित आय
  • छोटी और मध्यम अवधि के लिए अच्छे

हाइब्रिड निवेश फंड

ये फंड इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करते हैं। इससे जोखिम और रिटर्न का संतुलन बनता है।

विशेषताएं:

  • संतुलित जोखिम
  • विविधीकरण
  • मध्यम रिटर्न

लिक्विड निवेश फंड

ये फंड बहुत कम समय के लिए होते हैं। इनमें पैसा सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर जल्दी निकाला जा सकता है।

विशेषताएं:

  • बहुत कम जोखिम
  • तत्काल निकासी
  • आपातकालीन फंड के लिए उपयुक्त

टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड

इन्हें ईएलएसएस फंड भी कहते हैं। इनमें निवेश करने पर आयकर में छूट मिलती है।

विशेषताएं:

  • कर में छूट
  • तीन साल की लॉक-इन अवधि
  • इक्विटी में निवेश

सेक्टर और थीमैटिक फंड

ये फंड किसी खास क्षेत्र जैसे बैंकिंग, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करते हैं।

विशेषताएं:

  • केंद्रित निवेश
  • उच्च जोखिम
  • विशेष ज्ञान की जरूरत

निवेश फंड के फायदे

म्यूचुअल फंड में निवेश के अनेक लाभ हैं जो इसे आम निवेशकों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

पेशेवर प्रबंधन

आपका पैसा अनुभवी फंड मैनेजरों द्वारा प्रबंधित किया जाता है। ये विशेषज्ञ बाजार का लगातार अध्ययन करते हैं और सही निर्णय लेते हैं। आम निवेशक के पास इतना समय और ज्ञान नहीं होता।

विविधीकरण

निवेश फंड आपके पैसे को कई जगहों पर निवेश करता है। इससे जोखिम कम हो जाता है। अगर एक कंपनी का शेयर गिरता है तो दूसरी कंपनी का बढ़ सकता है।

कम राशि से शुरुआत

आप मात्र पांच सौ रुपये से भी म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू कर सकते हैं। यह छोटे निवेशकों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है।

तरलता

ज्यादातर म्यूचुअल फंड से आप अपना पैसा आसानी से निकाल सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यूनिट बेचकर पैसा मिल जाता है।

पारदर्शिता

निवेश फंड नियमित रूप से अपनी होल्डिंग और प्रदर्शन की जानकारी देते हैं। आप हर समय जान सकते हैं कि आपका पैसा कहाँ लगा है।

कर लाभ

कुछ म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर आयकर में छूट मिलती है। इससे आपकी बचत और बढ़ जाती है।

एसआईपी की सुविधा

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए आप हर महीने एक निश्चित राशि निवेश कर सकते हैं। यह अनुशासित निवेश की आदत बनाता है।

रुपये की औसत लागत

जब आप एसआईपी के माध्यम से निवेश करते हैं तो बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा मिलता है। जब बाजार नीचे होता है तो ज्यादा यूनिट मिलती हैं और जब ऊपर होता है तो कम।

म्यूचुअल फंड के नुकसान

हर निवेश के कुछ जोखिम होते हैं। म्यूचुअल फंड में भी कुछ सीमाएं और नुकसान हैं।

बाजार जोखिम

इक्विटी म्यूचुअल फंड शेयर बाजार में निवेश करते हैं। बाजार गिरने पर आपके निवेश की कीमत भी कम हो सकती है।

कोई गारंटी नहीं

म्यूचुअल फंड में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं है।

खर्च

म्यूचुअल फंड में प्रबंधन शुल्क और अन्य खर्चे लगते हैं। इन्हें एक्सपेंस रेशियो कहते हैं। यह आपके रिटर्न को थोड़ा कम करता है।

एग्जिट लोड

कुछ फंड में जल्दी पैसा निकालने पर शुल्क लगता है। इसे एग्जिट लोड कहते हैं।

फंड मैनेजर पर निर्भरता

आपका पैसा फंड मैनेजर के निर्णयों पर निर्भर करता है। अगर उनके निर्णय गलत हुए तो नुकसान हो सकता है।

म्यूचुअल फंड में निवेश कैसे करें?

म्यूचुअल फंड में निवेश करना बहुत आसान है। आइए जानते हैं पूरी प्रक्रिया।

केवाईसी पूरा करें

सबसे पहले आपको केवाईसी यानी अपने ग्राहक को जानिए की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और पते का प्रमाण चाहिए।

सही फंड चुनें

अपने लक्ष्य, समय अवधि और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार फंड चुनें। फंड का पिछला प्रदर्शन, फंड मैनेजर का अनुभव और खर्च अनुपात देखें।

निवेश का तरीका चुनें

आप एकमुश्त राशि निवेश कर सकते हैं या एसआईपी के जरिए हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश कर सकते हैं। नए निवेशकों के लिए एसआईपी बेहतर विकल्प है।

कहाँ से निवेश करें

आप सीधे फंड हाउस की वेबसाइट से, किसी वितरक के माध्यम से या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से निवेश कर सकते हैं।

नियमित समीक्षा

अपने निवेश की नियमित समीक्षा करते रहें। जरूरत पड़ने पर फंड बदलें या निवेश की राशि बढ़ाएं।

एसआईपी क्या है?

एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान म्यूचुअल फंड में निवेश का एक बहुत लोकप्रिय तरीका है।

एसआईपी कैसे काम करता है

इसमें आप हर महीने एक निश्चित तारीख को एक तय राशि निवेश करते हैं। यह राशि आपके बैंक खाते से अपने आप कट जाती है और म्यूचुअल फंड में निवेश हो जाती है।

एसआईपी के फायदे

अनुशासित निवेश: हर महीने नियमित निवेश की आदत बनती है।

छोटी राशि: आप पांच सौ रुपये से शुरू कर सकते हैं।

रुपये की औसत लागत: बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा मिलता है।

चक्रवृद्धि का लाभ: लंबे समय में आपका पैसा तेजी से बढ़ता है।

एनएवी क्या है?

एनएवी यानी नेट एसेट वैल्यू म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत होती है।

एनएवी की गणना

एनएवी की गणना रोज होती है। फंड की कुल संपत्ति में से देनदारियां घटाकर कुल यूनिट से भाग देने पर एनएवी मिलता है।

एनएवी = (कुल संपत्ति – कुल देनदारियां) / कुल यूनिट की संख्या

एनएवी का महत्व

जब आप म्यूचुअल फंड खरीदते या बेचते हैं तो एनएवी के आधार पर ही कीमत तय होती है। एनएवी बढ़ने का मतलब है कि आपके निवेश की कीमत बढ़ी है।

म्यूचुअल फंड बनाम अन्य निवेश विकल्प

आइए म्यूचुअल फंड की तुलना अन्य निवेश विकल्पों से करें।

म्यूचुअल फंड बनाम सावधि जमा

विशेषताम्यूचुअल फंडसावधि जमा
रिटर्नउच्च संभावनानिश्चित लेकिन कम
जोखिममध्यम से उच्चबहुत कम
तरलताअच्छीसीमित
कर लाभकुछ फंड मेंनहीं

म्यूचुअल फंड बनाम सीधा शेयर बाजार

म्यूचुअल फंड में विविधीकरण और पेशेवर प्रबंधन मिलता है। सीधे शेयर खरीदने में अधिक ज्ञान और समय चाहिए। जोखिम भी अधिक होता है।

म्यूचुअल फंड बनाम सोना

सोना परंपरागत निवेश है लेकिन इसमें रिटर्न कम होता है। म्यूचुअल फंड में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है।

म्यूचुअल फंड में कर

म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर कर लगता है। यह फंड के प्रकार और निवेश की अवधि पर निर्भर करता है।

इक्विटी फंड पर कर

एक साल से कम समय में बेचने पर लाभ को अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कहते हैं। इस पर पंद्रह प्रतिशत कर लगता है। एक साल से अधिक समय बाद बेचने पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ माना जाता है।

डेट फंड पर कर

डेट फंड में लाभ को आपकी आय में जोड़ा जाता है और आपके कर स्लैब के अनुसार कर लगता है।

ईएलएसएस में कर छूट

ईएलएसएस फंड में निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा अस्सी सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की छूट मिलती है।

सही म्यूचुअल फंड कैसे चुनें?

सही फंड चुनना बहुत जरूरी है। कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखें।

अपने लक्ष्य तय करें

सबसे पहले यह तय करें कि आप क्यों निवेश कर रहे हैं। घर खरीदना है, बच्चों की शिक्षा के लिए, रिटायरमेंट के लिए या कुछ और। लक्ष्य के अनुसार फंड चुनें।

समय अवधि देखें

अगर लक्ष्य दस-पंद्रह साल बाद है तो इक्विटी फंड अच्छे हैं। छोटी अवधि के लिए डेट फंड बेहतर हैं।

जोखिम क्षमता आंकें

अगर आप जोखिम ले सकते हैं तो इक्विटी फंड में निवेश करें। कम जोखिम चाहिए तो डेट या हाइब्रिड फंड चुनें।

प्रदर्शन देखें

फंड का पिछले तीन से पांच साल का प्रदर्शन देखें। सिर्फ एक साल का प्रदर्शन देखकर निर्णय न लें।

खर्च अनुपात देखें

कम खर्च अनुपात वाले फंड चुनें। यह आपका रिटर्न बढ़ाता है।

फंड मैनेजर का अनुभव

फंड मैनेजर का अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड जरूर देखें। अनुभवी मैनेजर बेहतर निर्णय लेते हैं।

म्यूचुअल फंड की गलतफहमियां

कई लोगों को म्यूचुअल फंड के बारे में गलत धारणाएं हैं। आइए इन्हें दूर करें।

सिर्फ अमीरों के लिए

यह बिल्कुल गलत है। आप पांच सौ रुपये से भी शुरू कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड हर वर्ग के लिए है।

बहुत जोखिम भरा

सभी म्यूचुअल फंड जोखिम भरे नहीं होते। डेट फंड में जोखिम बहुत कम होता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार फंड चुन सकते हैं।

गारंटीड रिटर्न

कुछ लोग सोचते हैं कि म्यूचुअल फंड में हमेशा लाभ होता है। यह गलत है। बाजार के अनुसार रिटर्न बदलता रहता है।

जटिल और मुश्किल

म्यूचुअल फंड को समझना और निवेश करना बहुत आसान है। थोड़ी सी जानकारी से कोई भी निवेश कर सकता है।

म्यूचुअल फंड में सफलता के सूत्र

कुछ महत्वपूर्ण बातें जो आपको म्यूचुअल फंड में सफल बना सकती हैं।

जल्दी शुरुआत करें

जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे उतना अधिक लाभ होगा। चक्रवृद्धि ब्याज का पूरा फायदा मिलेगा।

धैर्य रखें

म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलता है। छोटे उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं।

नियमित निवेश करें

एसआईपी के जरिए हर महीने निवेश करते रहें। बाजार के हर मौसम में निवेश करना फायदेमंद होता है।

विविधता रखें

अपना सारा पैसा एक ही फंड में न लगाएं। विभिन्न प्रकार के फंड में निवेश करें।

नियमित समीक्षा

साल में कम से कम दो बार अपने निवेश की समीक्षा करें। जरूरत पड़ने पर बदलाव करें।

भावनाओं में न आएं

बाजार गिरने पर घबराकर पैसा न निकालें। धैर्य रखें और लंबी अवधि पर ध्यान दें।

निष्कर्ष

म्यूचुअल फंड आज के समय में सबसे अच्छे निवेश विकल्पों में से एक है। यह छोटे और बड़े हर निवेशक के लिए उपयुक्त है। पेशेवर प्रबंधन, विविधीकरण, कम शुरुआती राशि और अच्छे रिटर्न की संभावना इसे खास बनाती है।

हालांकि इसमें कुछ जोखिम भी हैं लेकिन सही फंड चुनकर और लंबी अवधि के लिए निवेश करके इन्हें कम किया जा सकता है। म्यूचुअल फंड आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है चाहे वह घर खरीदना हो, बच्चों की पढ़ाई हो या रिटायरमेंट की योजना।

याद रखें कि निवेश करने से पहले अच्छी तरह से जानकारी इकट्ठी करें। अपने लक्ष्य, समय अवधि और जोखिम क्षमता के अनुसार फंड चुनें। जरूरत पड़े तो किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। धैर्य रखें और नियमित निवेश करते रहें। सफलता जरूर मिलेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

म्यूचुअल फंड में कितनी राशि से शुरुआत कर सकते हैं?

आप म्यूचुअल फंड में मात्र पांच सौ रुपये से एसआईपी शुरू कर सकते हैं। एकमुश्त निवेश के लिए अलग-अलग फंड की न्यूनतम राशि अलग हो सकती है लेकिन ज्यादातर फंड में पांच सौ से एक हजार रुपये से शुरुआत हो सकती है। यह छोटे निवेशकों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है।

क्या म्यूचुअलफंड सुरक्षित है?

म्यूचुअल फंड बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। हालांकि सभी म्यूचुअल फंड भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा नियंत्रित होते हैं जो निवेशकों के हितों की रक्षा करता है। डेट फंड में जोखिम कम होता है जबकि इक्विटी फंड में अधिक। आप अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार फंड चुन सकते हैं।

एसआईपी और एकमुश्त निवेश में क्या बेहतर है?

दोनों के अपने फायदे हैं। एसआईपी में हर महीने छोटी राशि निवेश होती है जिससे अनुशासन बनता है और बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा मिलता है। यह नए निवेशकों के लिए अच्छा है। एकमुश्त निवेश तब अच्छा है जब आपके पास बड़ी राशि है और बाजार सही समय पर है। ज्यादातर लोगों के लिए एसआीपी बेहतर विकल्प है।

म्यूचुअल फंड से पैसा कब निकाल सकते हैं?

ज्यादातर ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड से आप किसी भी समय पैसा निकाल सकते हैं। हालांकि कुछ फंड में एग्जिट लोड लग सकता है अगर आप जल्दी निकालते हैं। ईएलएसएस फंड में तीन साल की लॉक-इन अवधि होती है। लिक्विड फंड से तुरंत पैसा निकाला जा सकता है। पैसा आपके बैंक खाते में दो से तीन कार्य दिवस में आ जाता है।

म्यूचुअल फंड पर कितना रिटर्न मिलता है?

म्यूचुअल फंड में रिटर्न फंड के प्रकार और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। इक्विटी फंड में लंबी अवधि में बारह से पंद्रह प्रतिशत तक रिटर्न मिल सकता है। डेट फंड में छह से आठ प्रतिशत के आसपास रिटर्न होता है। हाइब्रिड फंड इन दोनों के बीच में होते हैं। याद रखें कि यह अनुमानित आंकड़े हैं और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है।

क्या म्यूचुअल फंड में नुकसान हो सकता है?

हां म्यूचुअल फंड में नुकसान हो सकता है खासकर अगर बाजार गिरता है। इक्विटी फंड में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव होता रहता है। हालांकि लंबी अवधि में बाजार ऊपर जाने की प्रवृत्ति रहती है। डेट फंड में नुकसान की संभावना बहुत कम होती है। जोखिम को कम करने के लिए विविधीकरण करें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें।

म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए डीमैट खाता जरूरी है?

नहीं म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए डीमैट खाता जरूरी नहीं है। आप सीधे फंड हाउस की वेबसाइट से या किसी वितरक के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। हालांकि अगर आप शेयर बाजार में भी निवेश करते हैं तो डीमैट खाते के जरिए म्यूचुअल फंड भी खरीद सकते हैं। इससे सब एक जगह रहता है।

म्यूचुअल फंड का चुनाव कैसे करें?

म्यूचुअल फंड चुनते समय कई बातों पर ध्यान दें। सबसे पहले अपने लक्ष्य और समय अवधि तय करें। फंड का पिछले तीन से पांच साल का प्रदर्शन देखें। खर्च अनुपात कम होना चाहिए। फंड मैनेजर का अनुभव देखें। फंड का निवेश दर्शन और रणनीति समझें। अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार इक्विटी डेट या हाइब्रिड फंड चुनें।

क्या म्यूचुअल फंड में निवेश पर टैक्स छूट मिलती है?

ईएलएसएस यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा अस्सी सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की कर छूट मिलती है। इसमें तीन साल की लॉक-इन अवधि होती है। अन्य म्यूचुअल फंड में निवेश पर सीधे कर छूट नहीं मिलती लेकिन लंबी अवधि के निवेश पर कर की दर कम होती है।

म्यूचुअल फंड और सावधि जमा में क्या अंतर है?

सावधि जमा में रिटर्न निश्चित होता है और जोखिम नहीं होता। म्यूचुअल फंड में रिटर्न बाजार पर निर्भर करता है और जोखिम होता है। लेकिन म्यूचुअल फंड में रिटर्न की संभावना ज्यादा होती है। सावधि जमा से मिलने वाले ब्याज पर पूरा कर लगता है जबकि म्यूचुअल फंड में कर लाभ मिल सकता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प है।


अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी संबंधित दस्तावेज ध्यानपूर्वक पढ़ें। जरूरत पड़ने पर किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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